भीषण गर्मी में बिजली की बर्बादी रोकने के लिए उत्तराखंड सरकार ने बनाई नई रणनीति

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देहरादून। देशभर में जारी भीषण गर्मी और रिकॉर्डतोड़ हीट वेव (लू) के चलते उत्तराखंड सहित पूरे देश में बिजली की मांग ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए उत्तराखंड शासन और ऊर्जा विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गए हैं। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें उन्होंने अधिकारियों को दोटूक निर्देश दिए कि प्रदेश के नागरिकों और पर्यटकों को बिना किसी कटौती के निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसी बीच, उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने प्रदेशवासियों से एक बेहद महत्वपूर्ण और भावुक अपील की है। यूपीसीएल ने कहा है कि ग्रिड पर बढ़ते भारी दबाव को देखते हुए जनता शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक (पीक आवर्स) बिजली का बेहद किफायती और न्यूनतम उपयोग करे। इस दौरान एयर कंडीशनर, कूलर और वाशिंग मशीन जैसे भारी बिजली खपत वाले उपकरणों का सीमित व समझदारी से इस्तेमाल करने का आग्रह किया गया है।

बैठक के दौरान यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक जी.एस. बुधियाल ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि 21 मई 2026 को देशभर में अब तक की सर्वाधिक बिजली मांग लगभग 270.8 गीगावाट दर्ज की गई, जिसने मई 2024 के 250 गीगावाट के रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया है। इसी दिन उत्तराखंड में भी इतिहास की सबसे बड़ी 2982 मेगावाट बिजली की मांग दर्ज की गई। उत्तर और मध्य भारत में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार होने से एसी और कूलरों की खपत अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है। हालात यह हैं कि ऊर्जा एक्सचेंजों में ₹10 प्रति यूनिट की अधिकतम दर देने के बावजूद भी राष्ट्रीय स्तर पर पीक आवर्स में पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही है। उत्तराखंड में बढ़ते संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीधे केंद्र सरकार से हस्तक्षेप का अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री के इस प्रयास के बाद केंद्र सरकार ने उत्तराखंड को केंद्रीय पूल से मिलने वाली 250 मेगावाट बिजली के अलावा 150 मेगावाट अतिरिक्त बिजली आवंटित कर दी है। इसके अतिरिक्त, यूपीसीएल ने उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए 1 से 15 मई तक 100 मेगावाट और 16 से 31 मई तक 225 मेगावाट अग्रिम विद्युत की विशेष व्यवस्था की है। मुख्य सचिव ने संतोष व्यक्त किया कि इतनी भारी मांग के बावजूद उत्तराखंड में अब तक किसी भी प्रकार की घोषित बिजली कटौती (रोस्टरिंग) नहीं की गई है। यूपीसीएल अग्रिम बिजली प्रबंधन योजना, रियल टाइम मॉनिटरिंग और ग्रिड समन्वय के जरिए आपूर्ति सुचारु रखे हुए है। बैठक में यह भी सामने आया कि यूजेवीएनएल द्वारा जल विद्युत उत्पादन से बड़ा सहयोग मिल रहा था, लेकिन पिछले दो-तीन दिनों में पर्वतीय क्षेत्रों में हुई बर्फबारी और बारिश के कारण जल विद्युत उत्पादन में करीब 4 मिलियन यूनिट की अस्थाई कमी आई है, जिसके आगामी दिनों में फिर से सुधरने की उम्मीद है। इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रमुख सचिव ऊर्जा आर. मीनाक्षी सुंदरम, मुख्य अभियंता एन.एस. बिष्ट, अधीक्षण अभियंता नवीन मिश्रा और अधिशासी अभियंता मनोज अग्रवाल सहित ऊर्जा विभाग के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने जनता से सहयोग की अपेक्षा करते हुए कहा कि ऊर्जा संरक्षण ही इस संकट का सबसे बड़ा समाधान है।