उत्तराखंड राजकीय कर्मचारी कल्याण संघ ने बाल्य देखभाल अवकाश के नए आदेश का स्वागत किया

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देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के हित में एक बड़ा फैसला लेते हुए बाल्य देखभाल अवकाश के नियमों में महत्वपूर्ण और बड़ा संशोधन किया है। सरकार द्वारा जारी नए शासनादेश के तहत अब महिला सरकारी कर्मचारियों और एकल अभिभावकों (महिला व पुरुष दोनों) के लिए छुट्टी की समय सीमा और उसे मंजूर करने की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया गया है।

नए नियमों के अनुसार, अब पात्र कर्मचारियों को एक बार में न्यूनतम 5 दिन और अधिकतम 120 दिन (चार महीने) से अधिक का बाल्य देखभाल अवकाश नहीं मिल सकेगा। इस संशोधन का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कर्मचारियों को अब छुट्टी के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा और बच्चों की देखभाल के लिए समय पर अवकाश मिल सकेगा।शासन द्वारा जारी संशोधित आदेश के मुताबिक, अब बाल्य देखभाल अवकाश की स्वीकृति प्रक्रिया को बेहद सरल और सुगम बना दिया गया है। पूर्व में इस अवकाश को स्वीकृत करने का अंतिम अधिकार केवल 'नियुक्ति प्राधिकारी' के पास होता था, जिसके कारण फाइलें लंबे समय तक अटकी रहती थीं। बड़ा प्रशासनिक बदलाव: सरकार ने अब इस व्यवस्था को बदलते हुए अवकाश स्वीकृत करने का अधिकार 'नियुक्ति प्राधिकारी' के बजाय सीधे 'सक्षम प्राधिकारी' को सौंप दिया है। यह वही सक्षम प्राधिकारी होंगे जो कर्मचारियों के उपार्जित अवकाश को स्वीकृत करते हैं। शासनादेश के अनुसार, अब सीसीएल को भी उपार्जित अवकाश की तरह ही सामान्य और त्वरित प्रक्रिया से स्वीकृत किया जाएगा। नए आदेश में यह पूरी तरह स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार के अधीन कार्यरत महिला सरकारी सेवकों और बच्चों की अकेले परवरिश करने वाले 'एकल अभिभावकों' (जिसमें पुरुष सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं) को उनके पूरे सेवाकाल में अधिकतम दो वर्ष का बाल्य देखभाल अवकाश मिलता है। यह अवकाश कुछ अनिवार्य शर्तों के अधीन ही प्रदान किया जाता है। इसके अलावा, नए नियमों में यह भी साफ किया गया है कि कर्मचारी द्वारा लिए गए बाल्य देखभाल अवकाश की अवधि के दौरान जितने भी सार्वजनिक या सरकारी अवकाश (संडे या अन्य राजपत्रित छुट्टियां) पड़ेंगे, उन्हें भी बाल्य देखभाल अवकाश का हिस्सा ही माना जाएगा। सरकार के इस कदम से खासकर महिला कर्मचारियों में खुशी की लहर है।