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बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने की मांग तेज: मूसलाधार बारिश के बीच सड़कों पर उतरे हजारों ग्रामीण, तहसील पर गरजा जनाक्रोश

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लालकुआं। बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा देने की दशकों पुरानी मांग को लेकर क्षेत्र के निवासियों का सब्र अब जवाब दे चुका है। लालकुआं में रविवार को मूसलाधार बारिश के बावजूद हजारों की संख्या में ग्रामीणों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ हुंकार भरी। वन अधिकार समिति के बैनर तले आयोजित इस विशाल विरोध प्रदर्शन और रैली ने साबित कर दिया कि अपने मूलभूत अधिकारों की लड़ाई में मौसम की दुश्वारियां भी ग्रामीणों के कदम नहीं रोक सकतीं।

बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा देने की वर्षों पुरानी मांग एक बार फिर जोर पकड़ती नजर आई। रविवार को भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़क पर उतर आए और सरकार से बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा देने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। वन अधिकार समिति के बैनर तले निकाली गई रैली में ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए अपनी मांग के समर्थन में आवाज बुलंद की। रैली जड़ सेक्टर के पास से शुरू हुई और लालकुआं तहसील परिसर पहुंचकर समाप्त हुई। इस दौरान बारिश के बीच भी ग्रामीणों की भीड़ जुटी रही। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बिंदुखत्ता क्षेत्र के लोग लंबे समय से राजस्व गांव के दर्जे की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक इस दिशा में ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। ग्रामीणों ने सरकार से उनकी पुरानी मांग पर जल्द कार्रवाई करने की अपील की। रविवार को मौसम खराब होने और लगातार बारिश के बावजूद ग्रामीण बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल हुए। जड़ सेक्टर से शुरू हुई रैली के दौरान ग्रामीणों ने बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने के समर्थन में नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि क्षेत्र की समस्याओं को लंबे समय से उठाया जा रहा है और अब सरकार को इस मांग पर स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए। रैली के तहसील परिसर पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने तहसीलदार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिए जाने की मांग को प्रमुखता से रखा गया। ग्रामीणों ने कहा कि यह मांग क्षेत्र के लोगों के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण विषय बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा मिलने से क्षेत्र के विकास कार्यों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को गति मिल सकती है। उनका कहना है कि राजस्व गांव का दर्जा मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों से जुड़े कई प्रशासनिक कार्यों में सुविधा मिलने की उम्मीद है। क्षेत्र में विकास योजनाओं और मूलभूत सुविधाओं के विस्तार को लेकर भी ग्रामीण इसे महत्वपूर्ण मानते हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बिंदुखत्ता के लोग लंबे समय से इस मांग को लेकर सरकार और प्रशासन के सामने अपनी बात रखते रहे हैं। इसके बावजूद मांग लंबित है। ग्रामीणों ने सरकार से मांग की कि उनकी समस्याओं और क्षेत्र की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राजस्व गांव के दर्जे को लेकर जल्द निर्णय लिया जाए। तहसील परिसर में प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग केवल प्रशासनिक दर्जे तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे क्षेत्र के विकास और लोगों के अधिकारों से जुड़े कई विषय जुड़े हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में जल्द कार्रवाई की मांग की। भारी बारिश के बावजूद प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी से आंदोलन की व्यापकता सामने आई। ग्रामीणों ने कहा कि जब तक उनकी वर्षों पुरानी मांग पर ठोस पहल नहीं होती, वे इसे लेकर अपनी आवाज उठाते रहेंगे। अब प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों की नजर सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।