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वोट का अधिकार छीनना सबसे बड़ा अपराध: राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर बोला सीधा हमला

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नई दिल्ली। राजधानी के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रविवार को आयोजित विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की महारैली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली का दावा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के गंभीर आरोप लगाए। रैली में देश भर से जुटे कार्यकर्ताओं और समर्थकों का आभार व्यक्त करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि यह जनसैलाब केवल किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि देश के युवाओं, किसानों और मजदूरों की सम्मिलित आवाज है। उन्होंने कहा कि यह भीड़ नरेंद्र मोदी, अमित शाह और ज्ञानेश कुमार को स्पष्ट संदेश दे रही है कि देश में लोकतंत्र और संविधान को नष्ट नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा, "सत्ता और धनबल कितना भी हो, कोई भी व्यक्ति या सरकार देश के संविधान से बड़ी नहीं हो सकती।" राहुल गांधी ने चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि देश में वर्षों से योजनाबद्ध तरीके से वोट चोरी की जा रही है। उन्होंने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक और 2024 के लोकसभा चुनावों का हवाला देते हुए कहा कि ईवीएम के साथ-साथ मतदाता सूचियों में भारी फेरबदल किया गया। आंकड़ों का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि 2024 के आम चुनावों के बाद लगभग 11.53 करोड़ मतदाताओं को वोटर लिस्ट से बाहर कर दिया गया। इसका अर्थ यह है कि देश के हर सात में से एक मतदाता (करीब 15 प्रतिशत) को मताधिकार से वंचित कर दिया गया। राहुल गांधी ने तर्क दिया कि चुनाव में एनडीए और विपक्ष के बीच मतों का अंतर मात्र 3 प्रतिशत था, जबकि 15 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाना एक सुनियोजित धांधली का स्पष्ट प्रमाण है।

मुख्य चुनाव आयुक्त पर सीधा निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को अपने पद से हटना होगा और उन्हें जेल जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य अपराध नहीं, बल्कि करोड़ों नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है, जिसे 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (रेरेस्ट ऑफ द रेयर) अपराध और देशद्रोह माना जाना चाहिए। उन्होंने तंज कसा कि यदि चुनाव आयोग की ऐसी भूमिका न होती, तो नरेंद्र मोदी और अमित शाह सत्ता में नहीं आ पाते। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने न्यायपालिका, सीबीआई, ईडी, पुलिस, नौकरशाही और शिक्षा तंत्र जैसी तमाम संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा कर लिया है। इसके साथ ही उन्होंने आर्थिक नीतियों पर केंद्र को घेरते हुए कहा कि देश के संसाधन दो-तीन बड़े उद्योगपतियों के हवाले किए जा रहे हैं। अरबपतियों के लाखों करोड़ के कर्ज चुटकियों में माफ हो जाते हैं, जबकि आम किसान, मजदूर और छोटा कारोबारी कर्ज न चुका पाने पर प्रताड़ित होता है। उन्होंने 'शिव की बारात' का उदाहरण देते हुए कहा कि देश ऐसा होना चाहिए जिसमें समाज के हर वर्ग को समान अवसर मिले। छात्र को मेहनत का फल और किसान को उसकी फसल का उचित दाम मिले, न कि देश के हवाई अड्डे, रेल, बिजली और संचार तंत्र किसी एक उद्योगपति की जागीर बनें। राहुल गांधी ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है और सत्ता परिवर्तन के बाद धांधली की निष्पक्ष जांच होगी और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष की यह लड़ाई व्यक्तिगत दुश्मनी या नफरत की नहीं है। वे महात्मा गांधी के बताए सत्य, अहिंसा और प्रेम के मार्ग पर चलते हुए समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े हर व्यक्ति, चाहे वह हिंदू, मुस्लिम, सिख, दलित, आदिवासी या महिला हो, के हक की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं।