सर्दियां दस्तक दे चुकी हैं और इसके साथ ही कॉर्बेट नेशनल पार्क से सटे जलाशयों में साइबेरियन पक्षियों ने डेरा जमाना शुरू कर दिया है। हर साल की तरह इस बार भी इन प्रवासी पक्षियों ने हजारों किलोमीटर की लंबी यात्रा तय कर साइबेरिया, तिब्बत और हिमालयी ऊंचे इलाकों से यहां का रुख किया है। पक्षियों को देखकर स्थानीय लोगों व सैलानियों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है।
मौसम के बदलते ही जैसे-जैसे हवा में ठंडक घुली, वैसे-वैसे प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। कोसी बैराज और उसके आसपास के जलाशयों में अब हर सुबह पक्षियों का कलरव सुनाई देने लगा है. यहां आने वाले पक्षियों में सुर्खाब (गोल्डन डक), पिंटेल, गीज, वॉल कीपर, ब्लैक स्टार्ट और करबोरेंच जैसी दुर्लभ प्रजातियां शामिल हैं। स्थानीय लोगों और पक्षी प्रेमियों के लिए यह मौसम किसी त्योहार से कम नहीं होता। गुनगुनी धूप में झील के ऊपर उड़ते परिंदों का मनमोहक नजारा सैलानियों के चेहरे पर मुस्कान ले आता है। रामनगर और कोसी बैराज इन दिनों वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों का नया हॉटस्पॉट बन गया है। प्रकृतिप्रेमी और फोटोग्राफर सुबह-सुबह अपने कैमरे के साथ पहुंचते हैं और इन दुर्लभ परिंदों को कैमरे में कैद करते हैं। वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर दीप राजवार ने बताया कि सर्द मौसम के शुरू होते ही प्रवासी पक्षी कोसी बैराज और कॉर्बेट लैंडस्केप से सटे क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं, यहां आकर इनकी चहचहाहट और अठखेलियां पूरे इलाके को जीवंत बना देती है। सुर्खाब पक्षी सबसे आकर्षक होते हैं, इन्हें देखने के लिए देश-विदेश से सैलानी यहां आते हैं और प्रकृति के इस अनोखे दृश्य का आनंद लेते हैं।
हर साल अक्टूबर से लेकर नवंबर के बीच ये साइबेरियन पक्षी अपनी लंबी यात्रा पूरी करके यहां पहुंचते हैं। इनकी यात्रा सात समुंदर पार की होती है और वे हजारों किलोमीटर का सफर तय कर हिमालय पार करते हुए उत्तराखंड के इन जलाशयों में आते हैं। अक्टूबर से लेकर मार्च तक यह परिंदे यहां रहते हैं और फिर गर्मी शुरू होने पर अपने वतन लौट जाते हैं। इनकी इस यात्रा को प्रकृति का अद्भुत चमत्कार माना जाता है, जो यह दर्शाती है कि जीव-जंतु भी मौसम के बदलाव को कितनी सटीकता से पहचानते हैं। रामनगर और कॉर्बेट लैंडस्केप के ये जलाशय इन प्रवासी पक्षियों के लिए आदर्श ठिकाना हैं यहां का शांत वातावरण, पर्याप्त भोजन और सुरक्षित जल क्षेत्र इन्हें लंबे समय तक रुकने के लिए प्रेरित करता है। कोसी घाटी के आसपास अब बर्ड वॉचिंग का नया दौर शुरू हो गया है. देश-विदेश से आने वाले सैलानी इन विदेशी मेहमानों को देखने के लिए कॉर्बेट पार्क के रामनगर, तुमड़िया जलाशय पहुंच रहे हैं। हर सुबह जब सूरज की पहली किरण झील के पानी पर पड़ती है, तो इन पक्षियों की झुंडों में उड़ान एक अद्भुत नजारा पेश करती है. स्थानीय गाइड्स बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में बर्ड वॉचिंग टूरिज्म ने रामनगर की अर्थव्यवस्था में नई जान फूंक दी है। स्थानीय लोग इन पक्षियों के आगमन को प्रकृति का तोहफा मानते हैं, जो पर्यटन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देता है। जहां इन परिंदों के आगमन से क्षेत्र में खुशहाली और रौनक बढ़ती है, वहीं इनकी सुरक्षा भी बड़ी चुनौती होती है।

