दुनियाभर में छात्र आंदोलन: शिक्षा खर्च और रोजगार के अवसरों पर छिड़ी बहस

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नई दिल्ली। दुनिया के कई देशों में इन दिनों सरकारों की नीतियों के खिलाफ असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। भारत से लेकर यूरोप और अमेरिका तक लोग महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा पर बढ़ते खर्च, आवास संकट और कम वेतन जैसे मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। फ्रांस, बेल्जियम, पुर्तगाल, इटली, अल्बानिया, तुर्किये, अर्जेंटीना और अमेरिका में हुए विरोध प्रदर्शनों ने सरकारों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इन आंदोलनों में कहीं छात्रों और शिक्षकों ने मोर्चा संभाला है, तो कहीं मजदूरों और पेंशनभोगियों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की है। फ्रांस में बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतों और घटती क्रय शक्ति के साथ शिक्षा बजट में कटौती को लेकर विरोध तेज हुआ है। छात्रों और शिक्षकों ने स्कूलों की बदहाल स्थिति पर सवाल उठाए हैं। पेरिस से शुरू हुआ छात्र आंदोलन धीरे-धीरे दूसरे इलाकों तक फैल गया। फ्रांस 24 के अनुसार, फ्रांसीसी आंतरिक मंत्री लॉरेंट नुनेज ने बताया कि क्रय शक्ति से जुड़े प्रदर्शनों में करीब 5.5 लाख लोगों ने हिस्सा लिया, जबकि पेरिस में लगभग 1.10 लाख लोग सड़कों पर उतरे। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें भी हुईं। इन घटनाक्रमों के बीच सरकार पर जनता की आर्थिक परेशानियों और शिक्षा संबंधी मांगों का समाधान निकालने का दबाव बढ़ रहा है।

बेल्जियम में सार्वजनिक खर्चों में कटौती और विश्वविद्यालयों की रजिस्ट्रेशन फीस बढ़ाने के विरोध में छात्र सड़कों पर उतरे। ब्रसेल्स और लिएज में प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच झड़पों के बाद वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। वहीं, पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में हजारों लोगों ने बढ़ती महंगाई, कम वेतन और किफायती मकानों की कमी के खिलाफ मार्च निकाला। संपत्ति की कीमतों और किराए में बढ़ोतरी से युवा कामगारों तथा कम आय वाले परिवारों की मुश्किलें बढ़ी हैं। इटली में भी स्थिर वेतन और रोजमर्रा के खर्चों को लेकर असंतोष देखने को मिला। मिलान में लोगों ने प्रदर्शन कर आर्थिक दबाव से राहत की मांग की। इन आंदोलनों ने यूरोप में आम नागरिकों की क्रय शक्ति और जीवनयापन की बढ़ती लागत से जुड़ी समस्याओं को सामने ला दिया है। अल्बानिया में छात्र विश्वविद्यालयों की स्थिति, पढ़ाई के बढ़ते खर्च और रोजगार के सीमित अवसरों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। 13 अक्टूबर को राजधानी तिराना में शिक्षा मंत्रालय के बाहर हुआ प्रदर्शन हिंसक हो गया। छात्रों की ओर से इमारत पर ईंटें और कंक्रीट के टुकड़े फेंके जाने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की।

तुर्किये में पेंशनभोगियों और मजदूर संगठनों ने महंगाई तथा अपर्याप्त पेंशन भुगतान के खिलाफ आवाज उठाई। अंकारा में प्रदर्शनकारियों ने सम्मानजनक जीवन जीने के लिए पर्याप्त पेंशन की मांग की। अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में राष्ट्रपति जेवियर माइली की शिक्षा नीतियों और बजट कटौती के विरोध में विश्वविद्यालयों के छात्रों, कर्मचारियों और ट्रेड यूनियन सदस्यों ने प्रदर्शन किया। संसद के बाहर हुआ प्रदर्शन मुख्य रूप से शांतिपूर्ण रहा, हालांकि कुछ प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प की खबरें आईं। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से असंतुष्ट लोगों ने ‘नो किंग्स’ नेटवर्क के तहत विभिन्न शहरों में रैलियां कीं। आयोजकों ने इन्हें गैर-पक्षपाती बताते हुए मध्यावधि चुनाव में मतदान के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने की बात कही। भारत में भी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में कथित गड़बड़ियों को लेकर विरोध जारी है। अलग-अलग देशों में आंदोलनों के मुद्दे भले ही अलग हों, लेकिन इनके केंद्र में आर्थिक दबाव, सार्वजनिक सेवाओं और सरकारी फैसलों को लेकर असंतोष दिखाई देता है। इन प्रदर्शनों ने साफ कर दिया है कि महंगाई, शिक्षा, रोजगार और सम्मानजनक जीवन जैसे सवालों पर जनता सरकारों से जवाब और राहत की उम्मीद कर रही है।