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उत्तराखंड को 25 साल तक मिलेगी सस्ती और निर्बाध बिजली: अडानी पावर के साथ ऐतिहासिक करार पर आयोग की मुहर

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उत्तराखंड के ऊर्जा भविष्य को मजबूती देने की दिशा में एक ऐतिहासिक और बड़ा कदम उठाया गया है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड और देश की दिग्गज ऊर्जा कंपनी अडानी पावर लिमिटेड के बीच आगामी 25 वर्षों के लिए 1234 मेगावाट बिजली खरीद के दीर्घकालिक समझौते और टैरिफ को औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा और सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी की संयुक्त पीठ ने इस महत्वपूर्ण याचिका पर फैसला सुनाते हुए ₹5.746 प्रति यूनिट की बेहद प्रतिस्पर्धी दर को स्वीकृति दे दी है।

बिजली की बढ़ती मांग और मौसमी संकट से निपटने के लिए उत्तराखंड सरकार और ऊर्जा निगम ने दीर्घकालिक व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) और अडानी पावर लिमिटेड के बीच 25 वर्षों के लिए 1234 मेगावाट बिजली खरीद के समझौते तथा निर्धारित दर को मंजूरी दे दी है। आयोग ने बिजली की दर 5.746 रुपये प्रति यूनिट स्वीकृत की है। इस फैसले के बाद दोनों कंपनियों के बीच औपचारिक अनुबंध का रास्ता साफ हो गया है। आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा और सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने यूपीसीएल की याचिका पर सुनवाई के बाद यह निर्णय दिया। प्रस्ताव के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2030-31 से उत्तराखंड को इस समझौते के तहत बिजली मिलनी शुरू होगी। इससे प्रदेश को लंबे समय तक बिजली आपूर्ति का एक अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध होगा। खासकर गर्मियों और सर्दियों में मांग बढ़ने पर बाजार से महंगे दामों पर तत्काल बिजली खरीदने की निर्भरता कम होने की उम्मीद है। यह बिजली केंद्र सरकार की शक्ति नीति के तहत राज्य को आवंटित कोयला लिंकेज का उपयोग कर स्थापित किए जाने वाले 1320 मेगावाट क्षमता के नए ताप विद्युत संयंत्र से जुटाई जाएगी। बिजली खरीद के लिए ई-निविदा प्रक्रिया अपनाई गई थी। इसमें तकनीकी रूप से पांच कंपनियां पात्र पाई गईं, जबकि तीन कंपनियों ने वित्तीय बोलियां प्रस्तुत कीं। वित्तीय बोलियों में अडानी पावर ने 5.746 रुपये प्रति यूनिट की दर दी। वहीं एमबी पावर (मध्य प्रदेश) लिमिटेड ने 6.237 रुपये और ललितपुर पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड ने 6.750 रुपये प्रति यूनिट की दर प्रस्तावित की। तीनों कंपनियों का मूल ईंधन शुल्क 1.147 रुपये प्रति यूनिट था, लेकिन कोयला खदान से संयंत्र की दूरी और परिवहन लागत ने दरों में अंतर पैदा किया। प्रस्तावित संयंत्र की कोयला खदान से दूरी करीब 149.37 किलोमीटर बताई गई है। इसके चलते अडानी पावर की कोयला ढुलाई लागत 0.299 रुपये प्रति यूनिट रही, जबकि अन्य दोनों कंपनियों की परिवहन लागत क्रमशः 0.570 रुपये और 1.213 रुपये प्रति यूनिट थी। सबसे कम दर होने के कारण अडानी पावर का प्रस्ताव चयनित हुआ। आयोग ने मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, असम और बिहार सहित अन्य राज्यों में हुए बिजली खरीद समझौतों की दरों से तुलना करने के बाद स्वीकृत टैरिफ को उचित माना। इसमें 4.300 रुपये प्रति यूनिट आधार स्थिर शुल्क और 1.446 रुपये प्रति यूनिट ईंधन एवं परिवहन शुल्क शामिल है। आयोग ने संयंत्र निर्माण के दौरान बदलाव या अतिरिक्त दावों के लिए खुली छूट देने से भी इनकार किया है। अब इस मंजूरी के बाद यूपीसीएल और अडानी पावर के बीच अनुबंध की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। हालांकि उपभोक्ताओं को इस बिजली का लाभ वर्ष 2030-31 से ही मिल सकेगा।