देहरादून। नियुक्ति की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत बीपीएड प्रशिक्षित बेरोजगारों ने रविवार को एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत बड़ी संख्या में प्रशिक्षित बेरोजगार परेड ग्राउंड के पास एकत्र हुए और शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के यमुना कॉलोनी स्थित सरकारी आवास का घेराव करने के लिए आगे बढ़े। हालांकि, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को परेड ग्राउंड के निकट कनक चौक पर बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इस दौरान बेरोजगारों और पुलिस के बीच काफी देर तक नोकझोंक और हंगामा हुआ। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। रविवार सुबह से ही बीपीएड प्रशिक्षित बेरोजगार परेड ग्राउंड के आसपास जुटने लगे थे। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की और सरकार से जल्द नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारी जैसे ही कनक चौक की ओर बढ़े, वहां पहले से तैनात पुलिस बल ने बैरिकेडिंग लगाकर उनका रास्ता रोक दिया। बेरोजगारों ने आगे बढ़ने का प्रयास किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान काफी देर तक मौके पर हंगामे की स्थिति बनी रही। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन जब वे अपनी मांगों को लेकर आगे बढ़ने पर अड़े रहे तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को बाद में ननूरखेड़ा स्थित शिक्षा निदेशालय ले जाया गया, जहां उन्हें छोड़ दिया गया।
बीपीएड प्रशिक्षित बेरोजगार संघ के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश पांडे ने कहा कि प्रशिक्षित बेरोजगार लंबे समय से नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि कई अभ्यर्थियों ने बीपीएड का प्रशिक्षण पूरा किया है और नियुक्ति की उम्मीद में वर्षों से इंतजार कर रहे हैं। इस दौरान कई अभ्यर्थी निर्धारित आयु सीमा को भी पार कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद नियुक्ति का रास्ता साफ नहीं हुआ है। जगदीश पांडे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही सरकारों ने अलग-अलग समय पर प्रशिक्षित बेरोजगारों को नियुक्ति का भरोसा दिया, लेकिन आश्वासनों के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि बेरोजगारों का आंदोलन लगातार जारी है। प्रशिक्षित बेरोजगार पिछले 75 दिनों से शिक्षा निदेशालय के बाहर धरने पर बैठे हैंए जबकि 58 दिनों से क्रमिक अनशन भी चल रहा है। संघ का कहना है कि शारीरिक शिक्षा को लेकर सरकार की नीतियों और जमीनी स्तर पर शिक्षकों की उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर है। बेरोजगारों का कहना है कि नई शिक्षा नीति के तहत शारीरिक शिक्षा को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। ऐसे में विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा शिक्षकों की नियुक्ति की दिशा में सरकार को ठोस कदम उठाना चाहिए। प्रशिक्षित बेरोजगारों की प्रमुख मांग उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शारीरिक शिक्षक (व्यायाम शिक्षक) के पद से संबंधित फाइल संख्या 77006 को वित्त विभाग से मंजूरी दिलाकर कैबिनेट से पारित कराना है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया को जल्द पूरा कर नियुक्ति का रास्ता खोला जाए, ताकि लंबे समय से रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके।

