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उत्तराखंड को यूपी के पुराने नियमों से मिली मुक्ति: धामी सरकार ने 'वेक्टर जनित रोग नियंत्रण नियमावली 2026' को दी मंजूरी

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देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने स्वास्थ्य एवं मलेरिया नियंत्रण क्षेत्र में एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए प्रदेश को उत्तर प्रदेश के दशकों पुराने नियमों से पूरी तरह आजाद कर दिया है। रविवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में 'उत्तराखंड वेक्टर जनित रोग नियंत्रण सेवा नियमावली 2026' को औपचारिक मंजूरी दे दी गई। इस नए फैसले के साथ ही अब विभाग अपनी आवश्यकतानुसार कार्मिकों की नियुक्ति और उनकी सेवा शर्तें खुद तय कर सकेगा।

उत्तराखंड में वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम और नियंत्रण से जुड़े विभागीय कामकाज को अब राज्य की अपनी नियमावली के तहत संचालित किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में रविवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड वेक्टर जनित रोग नियंत्रण सेवा नियमावली-2026 को मंजूरी दे दी गई। इस फैसले के साथ ही विभाग को उत्तर प्रदेश के पुराने सेवा नियमों से मुक्ति मिल गई है। राज्य गठन के बाद भी वेक्टर जनित रोग नियंत्रण से जुड़े विभाग में कार्मिकों की नियुक्ति और सेवा शर्तों के लिए उत्तर प्रदेश के समय से चली आ रही नियमावलियों का सहारा लिया जा रहा था। अब नई नियमावली लागू होने के बाद उत्तराखंड अपने स्तर पर विभागीय कार्मिकों की नियुक्ति, पदों की व्यवस्था और सेवा शर्तों से संबंधित प्रावधान तय कर सकेगा। अब तक विभाग में कार्मिकों की नियुक्ति और सेवा शर्तें उत्तर प्रदेश मलेरिया राजपत्रित अधिकारी सेवा नियमावली तथा उत्तर प्रदेश मलेरिया अराजपत्रित अधिकारी सेवा नियमावली-1993 के आधार पर निर्धारित की जा रही थीं। समय के साथ वेक्टर जनित रोगों का दायरा भी बढ़ा है। केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम का विस्तार किए जाने के बाद मलेरिया के अलावा अन्य वेक्टर जनित रोगों को भी इसके दायरे में शामिल किया गया। ऐसे में उत्तराखंड के लिए अलग और मौजूदा जरूरतों के अनुरूप सेवा नियमावली की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। नई नियमावली को मंजूरी मिलने से विभागीय ढांचे को राज्य की परिस्थितियों और जरूरतों के अनुरूप व्यवस्थित करने का रास्ता साफ हुआ है। इससे कार्मिकों की नियुक्ति और सेवा संबंधी प्रक्रियाओं में भी स्पष्टता आने की उम्मीद है। कैबिनेट के इस फैसले का एक महत्वपूर्ण असर विभाग में लंबे समय से रिक्त चल रहे 31 पदों पर भी पड़ेगा। नई नियमावली को मंजूरी मिलने के बाद इन पदों पर नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। लंबे समय से पद रिक्त होने के कारण विभागीय कार्यों पर पड़ रहे संभावित असर को देखते हुए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वेक्टर जनित रोगों में मच्छर और अन्य वाहकों के माध्यम से फैलने वाले रोग शामिल हैं। उत्तराखंड में बरसात और बदलते मौसम के दौरान ऐसे रोगों की रोकथाम स्वास्थ्य विभाग के लिए महत्वपूर्ण चुनौती रहती है। नई नियमावली के माध्यम से विभागीय मानव संसाधन को मजबूत करने और रोग नियंत्रण से जुड़ी व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। राज्य सरकार के इस फैसले से अब विभाग को अपने प्रशासनिक और कार्मिक मामलों के लिए उत्तर प्रदेश की पुरानी नियमावलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। नई नियमावली के जरिए उत्तराखंड में वेक्टर जनित रोग नियंत्रण व्यवस्था को राज्य की जरूरतों के अनुरूप संचालित करने का आधार तैयार हो गया है।