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उत्तराखंड सहकारिता चुनाव: छह जिला सहकारी बैंकों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों पर चुनाव संपन्न, देहरादून में मंजीत और कोटद्वार में पंकज ने मारी बाजी

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उत्तराखंड के सहकारिता क्षेत्र से बड़ी खबर आ रही है। प्रदेश के छह जिल देहरादून, टिहरी गढ़वाल, उत्तरकाशी, पौड़ी (कोटद्वार), चमोली और हरिद्वार में जिला सहकारी बैंकों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक ढंग से संपन्न हो गई है। मतदान और मतगणना के बाद सभी स्थानों पर विजयी प्रत्याशियों के नामों की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है।

प्रदेश के जिला सहकारी बैंकों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों को लेकर चल रही चुनावी प्रक्रिया का अहम चरण पूरा हो गया है। प्रदेश के छह जिलों में जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव संपन्न हुआ। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद अलग-अलग जिलों में नए नेतृत्व की तस्वीर भी साफ हो गई है। सहकारी बैंक चुनाव को लेकर बीते कई दिनों से चल रही राजनीतिक और सहकारी क्षेत्र की गतिविधियों के बाद अब नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के सामने बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत करने और सहकारी समितियों से जुड़े लोगों के हितों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। जानकारी के अनुसार टिहरी गढ़वाल, पौड़ी, चमोली, देहरादून, उत्तरकाशी और हरिद्वार समेत छह जिलों में जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया पूरी हुई। हालांकि उपलब्ध जानकारी में पांच अध्यक्षों के नाम सामने आए हैं। चुनाव में सुभाष रमोला को जिला सहकारी बैंक टिहरी गढ़वाल का अध्यक्ष चुना गया है। वहीं पंकज रावत ने जिला सहकारी बैंक कोटद्वार के अध्यक्ष पद पर बाजी मारी। गजेंद्र रावत को चमोली जिला सहकारी बैंक की कमान मिली है। राजधानी देहरादून में मंजीत रावत जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष चुने गए हैं। वहीं उत्तरकाशी जिले में शारदा राणा ने अध्यक्ष पद हासिल किया है। इन चुनावों के साथ संबंधित जिला सहकारी बैंकों के नेतृत्व को नई दिशा मिली है। सहकारी बैंक ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसानों, छोटे कारोबारियों, सहकारी समितियों और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े लोगों तक बैंकिंग एवं ऋण सुविधाएं पहुंचाने में इन संस्थानों की अहम भूमिका रहती है। ऐसे में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को केवल पदाधिकारियों के चयन के तौर पर नहीं, बल्कि सहकारी क्षेत्र की आगामी दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के साथ ही हरिद्वार और देहरादून में सोमवार को जिला प्रबंध कमेटी का चुनाव भी संपन्न हुआ। प्रबंध कमेटी के गठन के बाद संबंधित जिला सहकारी बैंक के संचालन और निर्णय प्रक्रिया को नई टीम के साथ आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है। सहकारी क्षेत्र में चुनाव के दौरान अध्यक्ष पद के लिए दावेदारों और समर्थकों के बीच लामबंदी भी देखने को मिली। अब चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सहकारी बैंकों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना होगी। जिला सहकारी बैंकों का सीधा जुड़ाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सहकारी समितियों से है। ऐसे में नई टीमों से उम्मीद की जा रही है कि वे किसानों और सहकारी संस्थाओं तक ऋण सुविधाओं की पहुंच आसान बनाने, बैंकिंग सेवाओं को मजबूत करने और सहकारी क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में काम करेंगी। छह जिलों में चुनाव संपन्न होने के साथ सहकारी बैंक नेतृत्व का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। अब नवनिर्वाचित अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के सामने अपने-अपने जिलों में सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को गति देने और सदस्यों के भरोसे पर खरा उतरने की चुनौती होगी।