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उत्तराखंड में एसआईआर की अंतिम तारीख बढ़ी, अब 3 अक्टूबर को होगा मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन

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देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम को लेकर निर्वाचन आयोग ने अपनी तैयारियों को और तेज कर दिया है। मंगलवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम की अध्यक्षता में राज्य के मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पुनरीक्षण कार्य की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक दलों के बहुमूल्य सुझाव प्राप्त किए गए।

प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम को लेकर चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की तारीख को आगे बढ़ाते हुए अब 3 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। इस संबंध में मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम की अध्यक्षता में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई। बैठक में एसआईआर की प्रगति, दावे-आपत्तियों के निस्तारण और आगामी प्रक्रिया को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राजनीतिक दलों को बताया कि प्रदेश में मतदाताओं को जारी किए गए 24 लाख 30 हजार नोटिसों में से 24 लाख 29 हजार से अधिक नोटिसों की सुनवाई पूरी की जा चुकी है। इससे एसआईआर प्रक्रिया के तहत नोटिसों के निस्तारण में तेजी का अंदाजा लगाया जा सकता है। बैठक में राजनीतिक दलों को बताया गया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन से संबंधित फॉर्म-6, 7 और 8 पर प्राप्त दावों और आपत्तियों में से भी 40 प्रतिशत से अधिक की सुनवाई पूरी कर ली गई है। निर्वाचन विभाग का फोकस अब लंबित दावों और आपत्तियों के जल्द निस्तारण पर है, ताकि अंतिम मतदाता सूची निर्धारित समय पर प्रकाशित की जा सके। एसआईआर प्रक्रिया में एक और महत्वपूर्ण कदम के तौर पर उत्तराखंड में डेमोग्राफिक सिमिलर एंट्री और फोटो सिमिलर एंट्री मॉड्यूल लागू किया जाएगा। इसके माध्यम से मतदाता सूची में समान या संदिग्ध रूप से मिलती-जुलती प्रविष्टियों की पहचान की जाएगी। निर्वाचन विभाग के अनुसार, मॉड्यूल के तहत जिन मतदाताओं के नाम ऐसी प्रविष्टियों में पाए जाएंगे, उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा। संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा। इसके बाद प्राप्त जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बैठक में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से एसआईआर को लेकर सुझाव भी प्राप्त किए। निर्वाचन विभाग ने प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और सभी दावों-आपत्तियों का नियमानुसार निस्तारण करने की बात कही। बैठक में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी और सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास मौजूद रहे। भाजपा की ओर से राजकुमार पुरोहित और एडवोकेट सतेंद्र जैन, कांग्रेस से मनोज रावत, बसपा से सतेंद्र चोपड़ा और भीमराव, आम आदमी पार्टी से श्याम बाबू पांडेय तथा सीपीआई(एम) से अनंत आकाश ने बैठक में हिस्सा लिया। अब एसआईआर की प्रक्रिया में अगला अहम पड़ाव 3 अक्टूबर होगा। इससे पहले लंबित दावों-आपत्तियों का निस्तारण और डीएसई/पीएसई से सामने आने वाली प्रविष्टियों की जांच पूरी करना निर्वाचन विभाग के सामने महत्वपूर्ण चुनौती रहेगी। अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ प्रदेश में मतदाता सूची पुनरीक्षण की यह प्रक्रिया निर्णायक चरण में पहुंच जाएगी।