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उत्तराखंड कांग्रेस की 17 अगस्त को दिल्ली में बड़ी बैठक, चुनावी रणनीति और कार्यक्रमों पर होगा मंथन

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उत्तराखंड में आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी हलचलें तेज हो गई हैं। सत्ताधारी भाजपा जहां हैट्रिक लगाने की तैयारी में जुट गई है, वहीं पिछले दो चुनावों से सत्ता से बाहर चल रही कांग्रेस भी वापसी के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। इसी कड़ी में उत्तराखंड कांग्रेस ने चुनावी रणनीति को धार देने के लिए 17 अगस्त को दिल्ली में एक बड़ी बैठक बुलाई है। इस बैठक में प्रदेश के शीर्ष नेताओं के साथ मिलकर आगामी डेढ़ महीने के संगठनात्मक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां अब धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ने लगी हैं। भाजपा के बाद अब कांग्रेस भी संगठन को चुनावी मोड में लाने की तैयारी में जुट गई है। इसी क्रम में 17 अगस्त को दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अहम बैठक होने जा रही है। बैठक में आगामी एक से डेढ़ महीने के संगठनात्मक कार्यक्रमों और चुनावी रणनीति पर विस्तार से मंथन किया जाएगा। पार्टी का फोकस बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और प्रमुख मुद्दों को लेकर जनता के बीच पहुंच बढ़ाने पर रहेगा। कांग्रेस की इस बैठक को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के मुताबिक, बैठक में आने वाले दिनों के कार्यक्रम तय किए जाएंगे। साथ ही राष्ट्रीय नेतृत्व से उत्तराखंड में अधिक से अधिक कार्यक्रम कराने को लेकर भी चर्चा होगी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से उत्तराखंड में कार्यक्रमों के लिए पूरा सहयोग देने का भरोसा मिला है। पार्टी की ओर से कार्यक्रमों की मांग किए जाने पर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत अन्य राष्ट्रीय नेताओं के कार्यक्रम उत्तराखंड में आयोजित किए जाएंगे। पार्टी की रणनीति में राष्ट्रीय नेताओं के कार्यक्रमों के जरिए कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ाने के साथ ही प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक और जन मुद्दों को राष्ट्रीय मंच पर उठाना भी शामिल हो सकता है। कांग्रेस का मानना है कि चुनाव से पहले संगठन और जनता के बीच सीधा संपर्क मजबूत करना जरूरी है। 2027 के चुनाव को लेकर भाजपा पहले ही संगठनात्मक कार्यक्रमों की रूपरेखा जारी कर चुकी है। 5 अगस्त को दिल्ली में भाजपा की उत्तराखंड प्रदेश कोर कमेटी की बैठक हुई थी, जिसमें अगस्त और सितंबर के संगठनात्मक कार्यक्रमों पर चर्चा की गई। इसके बाद पार्टी ने करीब डेढ़ महीने के कार्यक्रम तय किए हैं। भाजपा की ओर से प्रदेशभर में तिरंगा यात्रा और ‘हर घर तिरंगा’ अभियान चलाया जा रहा है। इसके अलावा बूथ सशक्तीकरण, शक्ति केंद्रों की बैठक, लोकसभावार बैठक और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से संवाद जैसे कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं। 16 अगस्त को कुमाऊं मंडल के जिला और मंडल अध्यक्षों की हल्द्वानी में बैठक भी प्रस्तावित है। ऐसे में भाजपा के संगठनात्मक अभियान के बाद कांग्रेस की दिल्ली बैठक को चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों प्रमुख दलों का जोर अब बूथ स्तर के संगठन को मजबूत करने पर है। राजनीतिक दलों के बीच यह रणनीतिक मुकाबला आगामी विधानसभा चुनाव से पहले और तेज होने के संकेत दे रहा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि पार्टी चुनाव की तैयारी कर रही है, लेकिन उनके मुताबिक जनता भी चुनाव का इंतजार कर रही है। कांग्रेस आने वाले समय में बेरोजगारी, सरकारी नौकरियों में अनियमितता और भर्ती-पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस का दावा है कि ये मुद्दे प्रदेश के युवाओं और आम लोगों से सीधे जुड़े हुए हैं। पार्टी इन्हें लेकर जनता के बीच जाएगी और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाएगी। इसके अलावा महंगाई, विकास, पलायन और रोजगार से जुड़े मुद्दों को भी चुनावी अभियान में प्रमुखता दिए जाने की संभावना है। उत्तराखंड में कांग्रेस लगातार दो विधानसभा चुनावों में सत्ता से बाहर रही है। ऐसे में 2027 का चुनाव पार्टी के लिए सिर्फ सत्ता में वापसी का मौका नहीं, बल्कि संगठन की राजनीतिक ताकत साबित करने की बड़ी परीक्षा भी है। वहीं भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की कोशिश में जुटी है। यही वजह है कि दोनों दल चुनाव से काफी पहले संगठनात्मक स्तर पर सक्रिय हो रहे हैं। कांग्रेस की 17 अगस्त की दिल्ली बैठक के बाद अगले डेढ़ महीने के कार्यक्रम सामने आने से पार्टी के चुनावी अभियान की दिशा और प्राथमिकताएं भी स्पष्ट होने की उम्मीद है। अब निगाहें इस बैठक में तय होने वाली रणनीति और उसके बाद उत्तराखंड में होने वाले पार्टी कार्यक्रमों पर रहेंगी।