उत्तराखंड का फैसला वन भर्ती मानकों में नया मानक स्थापित करेगा

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उत्तराखंड सरकार ने वन विभाग के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और कार्यप्रणाली में पेशेवर दक्षता (Professional Efficiency) लाने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में वन विभाग के विभिन्न पदों के लिए भर्ती नियमों और सेवा नियमावली में बड़े संशोधनों पर मुहर लगा दी गई है। इस निर्णय के तहत अब वन दरोगा के पद के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता को इंटरमीडिएट से बढ़ाकर स्नातक (ग्रेजुएशन) कर दिया गया है। साथ ही, वन आरक्षी और सांख्यिकीय अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया को भी व्यवस्थित करने के लिए नए मानक तय किए गए हैं।

वन विभाग में फील्ड स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माने जाने वाले 'वन दरोगा' (Forester) के पद के लिए अब तक शैक्षणिक योग्यता केवल 12वीं पास थी। लंबे समय से वन दरोगा संगठन यह मांग कर रहा था कि बदलते समय और तकनीकी चुनौतियों को देखते हुए इस पद की योग्यता बढ़ाई जाए। कैबिनेट के फैसले के बाद अब केवल स्नातक डिग्री धारक युवा ही इस पद के लिए आवेदन कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि उच्च शिक्षित युवाओं के विभाग में आने से वन संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन और प्रशासनिक कार्यों में बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे। सरकार के इस फैसले का विभागीय कर्मचारियों ने स्वागत किया है। वन दरोगा संगठन के प्रदेश अध्यक्ष स्वरूप चंद रमोला ने कहा, "यह मांग लंबे समय से लंबित थी। योग्यता बढ़ने से विभाग में प्रतिभावान युवाओं का प्रवेश होगा, जिससे आधुनिक वन प्रबंधन और वनों के वैज्ञानिक संरक्षण में सकारात्मक बदलाव आएगा। इसके लिए हम शासन और विभागीय अधिकारियों के आभारी हैं। सांख्यिकीय अधिकारियों की भर्ती में तकनीकी दक्षता को अब प्राथमिकता दी जाएगी। विभाग के पास उपलब्ध वन डेटा के सटीक विश्लेषण के लिए इन पदों पर होने वाली सीधी भर्ती के नियमों को कड़ा और स्पष्ट बनाया गया है, ताकि वन संपदा का डेटा प्रबंधन अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो सके। उत्तराखंड जैसे वन संपदा से समृद्ध राज्य के लिए यह कदम मील का पत्थर साबित हो सकता है। भर्ती नियमों में यह बदलाव न केवल युवाओं को बेहतर करियर विकल्प देगा, बल्कि राज्य के पर्यावरण और वन क्षेत्रों की सुरक्षा को भी एक नया आयाम प्रदान करेगा।