देहरादून। उत्तराखंड के महाविद्यालयों में हाल ही में संपन्न हुए छात्र संघ चुनाव के परिणामों ने राज्य के राजनीतिक पारे को गरमा दिया है। भारतीय जनता पार्टी और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के खेमे में जश्न का माहौल है। पार्टी और छात्र संगठन का दावा है कि इस बार चुनाव में एबीवीपी ने प्रदेश की 85 प्रतिशत से अधिक सीटों पर ऐतिहासिक जीत हासिल की है। इस भारी सफलता के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने परिषद के विजयी उम्मीदवारों को बधाई देते हुए इसे युवाओं का राष्ट्रवाद और सरकार की नीतियों पर मुहर बताया है।
उत्तराखंड के महाविद्यालयों में हुए छात्र संघ चुनाव के नतीजों ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। चुनाव परिणामों के बाद भाजपा ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की बड़ी जीत का दावा किया है। भाजपा के अनुसार, प्रदेश में करीब 85 प्रतिशत सीटों पर एबीवीपी समर्थित प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। इन परिणामों के बाद पार्टी संगठन में उत्साह है, वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विजयी प्रत्याशियों को बधाई देते हुए इसे युवाओं की सोच और छात्रहित से जुड़े मुद्दों पर मिले समर्थन के रूप में प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि छात्र संघ चुनाव में युवाओं ने ‘‘झूठ की गूंज’’ को बेनकाब किया है। उनके मुताबिक, चुनाव परिणामों ने यह संदेश दिया है कि उत्तराखंड की युवा शक्ति राष्ट्रवादी विचारधारा और छात्रहित के लिए काम करने वाले संगठन के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि युवाओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हुए उन विचारों को जवाब दिया है, जिनके बारे में उनका आरोप है कि वे युवाओं को भ्रमित करने का प्रयास करते हैं। मुख्यमंत्री ने छात्र संघ चुनाव के नतीजों को केवल महाविद्यालयों तक सीमित घटनाक्रम के बजाय युवाओं के बीच चल रही वैचारिक बहस से भी जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि परिणाम उन ताकतों के लिए संदेश हैं, जो युवाओं को कॉमेडी, जातिवाद और सेना तथा महापुरुषों के अपमान से जुड़ी सोच के साथ जोड़ना चाहती हैं। धामी ने दावा किया कि उत्तराखंड के युवाओं ने अपने वोट की ताकत से ऐसी विचारधारा को जवाब दिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी छात्र संघ चुनाव के परिणामों को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि एबीवीपी को 85 प्रतिशत सीटों पर मिली जीत इस बात का संकेत है कि प्रदेश के युवाओं ने मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में लिए गए निर्णयों पर भरोसा जताया है। भट्ट ने दावा किया कि युवा पीढ़ी ने केंद्र और राज्य सरकार की युवा कल्याणकारी योजनाओं, रोजगार के प्रयासों और पारदर्शी व्यवस्थाओं को समर्थन दिया है। उनके मुताबिक, शिक्षण संस्थानों में बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार करने और युवाओं के भविष्य को लेकर किए जा रहे प्रयासों का असर छात्र संघ चुनाव के परिणामों में दिखाई दिया है। छात्र संघ चुनाव सामान्य तौर पर कैंपस की राजनीति से जुड़े चुनाव होते हैं, लेकिन उत्तराखंड जैसे राजनीतिक रूप से सक्रिय राज्य में इनके परिणामों का असर व्यापक राजनीतिक विमर्श में भी दिखाई देता है। इस बार भाजपा ने एबीवीपी के प्रदर्शन को सरकार की नीतियों और युवाओं के बीच उसकी स्वीकार्यता से जोड़कर पेश किया है। हालांकि, 85 प्रतिशत सीटों पर जीत का आंकड़ा भाजपा का दावा है और चुनाव परिणामों का अंतिम आकलन सभी महाविद्यालयों के आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर ही किया जाना होगा। अलग-अलग संस्थानों में स्थानीय मुद्दे, प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ और छात्र संगठनों की सक्रियता भी परिणामों को प्रभावित करती है। फिलहाल छात्र संघ चुनाव के नतीजों ने उत्तराखंड के कैंपसों में एबीवीपी की मौजूदगी को लेकर भाजपा के दावे को राजनीतिक चर्चा का विषय बना दिया है। आने वाले दिनों में यही परिणाम छात्र राजनीति के साथ-साथ प्रदेश की युवा राजनीति की दिशा को लेकर भी बहस का आधार बन सकते हैं।

