ग्रामीण उत्तराखंड का आर्थिक कायाकल्प: पशुधन मिशन से जुड़कर हजारों परिवारों को मिला स्थायी रोजगार समाधान

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देहरादून। उत्तराखंड की 'देवभूमि' अब 'उद्यम भूमि' बनने की ओर अग्रसर है। राज्य के ग्रामीण और विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में आर्थिकी की रीढ़ को मजबूत करने के लिए धामी सरकार की 'मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन योजना' एक गेम-चेंजर साबित हो रही है। इस योजना ने न केवल पलायन पर अंकुश लगाया है, बल्कि ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए घर पर ही सम्मानजनक आजीविका के द्वार खोल दिए हैं।

उत्तराखंड के ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार की मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन योजना उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है। इस योजना के तहत ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को डेयरी, बकरी पालन, भेड़ पालन, पोल्ट्री और अन्य पशुपालन आधारित इकाइयां स्थापित करने के लिए बैंक ऋण पर 90 प्रतिशत तक ब्याज अनुदान दिया जा रहा है। सरकार की इस पहल से गांवों में स्वरोजगार को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ किसानों और पशुपालकों की आय में भी वृद्धि हो रही है। राज्य सरकार का उद्देश्य पलायन रोकने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना है। मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन के अंतर्गत कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत 5 से 10 गाय या 2 से 5 भैंस पालन के लिए आर्थिक सहायता और ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं लघु पशु उद्यमिता योजना में भेड़-बकरी पालन और सुअर पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा पोल्ट्री व्यवसाय को प्रोत्साहित करने के लिए 1000 पक्षियों वाले ब्रायलर फार्म और 250 पक्षियों वाले लेयर फार्म स्थापित करने हेतु भी सहायता दी जा रही है। पर्वतीय क्षेत्रों की जरूरतों को देखते हुए ड्राफ्ट पशु उद्यमिता योजना के तहत खच्चर पालन के लिए भी ऋण सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को सीधा लाभ मिल रहा है। योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बैंक ऋण पर लगने वाले ब्याज का 90 प्रतिशत तक हिस्सा राज्य सरकार वहन कर रही है। इससे कम पूंजी वाले ग्रामीण परिवार भी आसानी से अपना व्यवसाय शुरू कर पा रहे हैं। खासकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए योजना में विशेष प्राथमिकता दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाएं डेयरी और पशुपालन व्यवसाय से जुड़कर आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से न केवल किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ेगी, बल्कि राज्य में दूध, मांस और अंडों की उपलब्धता में भी सुधार होगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और पलायन जैसी समस्याओं पर भी रोक लगेगी। राज्य सरकार ने पात्र लाभार्थियों से योजना का लाभ उठाने की अपील की है। योजना से जुड़ी अधिक जानकारी, पात्रता और आवेदन प्रक्रिया के लिए लोग पशुपालन विभाग, उत्तराखंड की आधिकारिक वेबसाइट या नजदीकी पशुपालन विभाग कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।