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लोकतंत्र की मजबूती के लिए सीएम धामी ने खुद भरा 'गणना फॉर्म': मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपा

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उत्तराखंड में मतदाता सूची को पूरी तरह पारदर्शी, सटीक और त्रुटिरहित बनाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) कार्यक्रम का भव्य आगाज हो गया है। इस राष्ट्रीय अभियान को गति देने के लिए खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आगे आकर मोर्चा संभाला। सोमवार को मुख्यमंत्री ने सचिवालय में स्वयं अपना मतदाता गणना फॉर्म भरा और उसे मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम को सौंपकर इस महाअभियान की औपचारिक शुरुआत की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने समस्त प्रदेशवासियों से 8 जून से आगामी 7 जुलाई 2026 तक चलने वाले इस विशेष पुनरीक्षण अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने और अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की पुरजोर अपील की।

सचिवालय में फॉर्म सौंपने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, अद्यतन (अपडेटेड) एवं त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से यह विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान संचालित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र में प्रत्येक वोट के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा एक सुदृढ़ और मजबूत लोकतंत्र के लिए यह बेहद आवश्यक है कि प्रत्येक पात्र और योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची में पूरी तरह सही ढंग से दर्ज हो। मतदान का अधिकार हमारे लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है और इस ताकत की रक्षा करना तथा इसे त्रुटिहीन बनाना हम सभी देशवासियों का परम दायित्व है। मुख्यमंत्री ने बताया कि आज से शुरू होकर अगले एक महीने (7 जुलाई) तक चलने वाले इस अभियान के तहत बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) राज्य के कोने-कोने में घर-घर पहुंचेंगे। बीएलओ द्वारा सभी मतदाताओं का भौतिक सत्यापन किया जाएगा और गणना फॉर्म भरवाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी नागरिकों, प्रबुद्ध जनों और कामकाजी वर्ग से आग्रह किया कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने गणना फॉर्म को भरें और अपने मतदाता विवरण की जांच कर उसका सत्यापन जरूर कराएं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाने के लिए सभी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों, बूथ स्तर के कर्मचारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से आपसी समन्वय के साथ सहयोग करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार निर्वाचन आयोग के इस व्यापक अभियान को सफल बनाने के लिए हर स्तर पर पूर्ण प्रशासनिक और तकनीकी सहयोग प्रदान कर रही है। सरकार का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी पात्र मतदाता किन्हीं तकनीकी कमियों या सूचना के अभाव के कारण अपने सबसे बड़े संवैधानिक अधिकार यानी 'मताधिकार' से वंचित न रहने पाए।