BKU नेताओं का पुलिस अधिकारियों पर एनकाउंटर की साजिश का आरोप

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मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में भारतीय किसान यूनियन (बीआर आंबेडकर) से जुड़े किसान नेताओं ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाकर सनसनी मचा दी है। संगठन के अध्यक्ष डॉ. दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव शुक्रवार को सपा विधायक अतुल प्रधान के आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई का जिक्र करते हुए भावुक हो गए और फूट-फूटकर रो पड़े। दोनों ने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों ने उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया, बेरहमी से मारपीट की और उन्हें गंभीर रूप से प्रताड़ित किया गया। किसान नेताओं के आरोपों के बाद मेरठ से लेकर लखनऊ तक राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह मेरठ पहुंचे हैं और पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। वहीं एडीजी भानु भास्कर ने भी स्वीकार किया है कि विवाद एसएसपी कार्यालय से जुड़ा हुआ है, जहां किसान नेता किसी मुद्दे को लेकर बातचीत करने पहुंचे थे। डॉ. दिग्विजय भाटी के मुताबिक, 19 अगस्त को वह ललिता गौतम हत्याकांड से जुड़े विरोध-प्रदर्शन के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए एसएसपी अविनाश पांडेय से मिलने पहुंचे थे। उनका दावा है कि वह प्रदर्शन में शामिल नहीं थे और इसी संबंध में अपनी बात रखने के लिए पुलिस अधिकारियों से मुलाकात करना चाहते थे। दिग्विजय भाटी का आरोप है कि एसएसपी कार्यालय से उन्हें सिविल लाइन थाना प्रभारी अखिलेश गौड़ एसओजी कार्यालय ले गए। वहां कथित तौर पर दोनों के साथ मारपीट की गई। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि उनके हाथ-पैर बांधकर उन्हें पीटा गया और उन्हें मानसिक रूप से भी प्रताड़ित किया गया।

गाना बजाकर नचाने और प्रताड़ित करने का दावा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. दिग्विजय भाटी ने पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि कथित तौर पर इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ ने मोबाइल पर फिल्म का गाना चलाया और उन्हें बार-बार नचाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सिर पर कपड़ा डालकर उन्हें प्रताड़ित किया गया। दिग्विजय ने दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने उनकी उंगलियों पर लाठी से चोट की और कथित तौर पर यह कहा कि कुछ दिनों तक वह अपने हाथों से खाना नहीं खा पाएंगे। उन्होंने पुलिस अधिकारियों पर उनके खिलाफ एनकाउंटर की साजिश रचने का भी गंभीर आरोप लगाया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की जांच और सामने आने वाले साक्ष्यों के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था।

पुलिस ने आरोपों से अलग बताया घटनाक्रम
मामला सामने आने और सोशल मीडिया पर संबंधित वीडियो वायरल होने के बाद मेरठ पुलिस ने अपना पक्ष रखा। पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से जारी जानकारी के अनुसार, दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव के खिलाफ पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं और पुलिस ने दोनों को अपने-अपने थानों का हिस्ट्रीशीटर बताया है। पुलिस का दावा है कि दोनों बुधवार को सिविल लाइन थाने में दर्ज एक मुकदमे के संबंध में आए थे। पुलिस के मुताबिक, वहां से वापस लौटते समय स्कूटी फिसलने के कारण दोनों गिर गए और उन्हें चोटें आईं। पुलिस का कहना है कि इस संबंध में दोनों ने सिविल लाइन थाने में लिखित प्रार्थना पत्र भी दिया था। हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किसान नेताओं ने पुलिस के इस दावे को खारिज कर दिया। उनका कहना था कि उनसे दबाव बनाकर कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करवाए गए थे। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के कारण अब जांच की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा मामला
किसान नेताओं के साथ कथित मारपीट से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला तेजी से तूल पकड़ गया। वीडियो और प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद राजनीतिक दलों ने भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। सपा विधायक अतुल प्रधान ने किसान नेताओं का समर्थन करते हुए पूरे मामले में जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। अतुल प्रधान ने कहा कि यदि किसान नेताओं के साथ इस तरह का व्यवहार हुआ है तो यह बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने सरकार से पूरे प्रकरण का संज्ञान लेकर मुकदमा दर्ज करने और संबंधित अधिकारियों की जांच कराने की मांग की। उन्होंने आरोपी अधिकारी का स्वास्थ्य परीक्षण कराने की मांग भी रखी। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी घटना को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने किसान नेताओं के आरोपों को गंभीर बताते हुए इसे किसान और देश का अपमान करार दिया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। घटना के बाद विपक्ष ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं।

डीआईजी ने मेरठ पहुंचकर शुरू की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह मेरठ पहुंचे और पूरे घटनाक्रम से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी जुटानी शुरू की। जांच में किसान नेताओं के आरोप, पुलिस का पक्ष, वायरल वीडियो, थाने में दर्ज दस्तावेज और घटनाक्रम से जुड़े अन्य तथ्यों को देखा जा रहा है। एडीजी भानु भास्कर ने भी कहा है कि विवाद एसएसपी कार्यालय से जुड़ा था, जहां किसान नेता किसी मुद्दे पर बातचीत करने पहुंचे थे। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों पक्षों के दावों में सच्चाई क्या है और कथित मारपीट की घटना किन परिस्थितियों में हुई। मेरठ का यह मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ किसान नेताओं ने पुलिस पर गंभीर बर्बरता और कथित एनकाउंटर की साजिश जैसे आरोप लगाए हैं, तो दूसरी ओर पुलिस ने चोटों को स्कूटी से गिरने से जोड़ते हुए अपना अलग पक्ष रखा है।