हैदराबाद और देहरादून से पास आउट हुईं महिला अधिकारी, भारतीय सेना में बढ़ा महिलाओं का गौरव

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भारतीय सैन्य इतिहास में शनिवार का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। देहरादून स्थित प्रतिष्ठित भारतीय सैन्य अकादमी की पासिंग आउट परेड में वह ऐतिहासिक पल आया, जिसका देश को लंबे समय से इंतजार था। अकादमी के 94 वर्षों के गौरवशाली इतिहास में पहली बार राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पहले महिला बैच की 9 महिला कैडेट्स कड़े प्रशिक्षण को पूरा कर भारतीय थल सेना में बतौर सैन्य अधिकारी शामिल हो गईं। 

देश के लिए दोहरी खुशी की बात यह रही कि आज ही के दिन हैदराबाद के डुंडीगल स्थित भारतीय वायुसेना अकादमी से भी 5 महिला कैडेट्स ने विंग्स हासिल किए। इस तरह भारतीय सशस्त्र बलों को एक ही दिन में 14 जांबाज महिला अफसर मिली हैं, जो अब सीमाओं पर देश की संप्रभुता की रक्षा करेंगी। थल, सेना और वायुसेना की सर्वोच्च कमांडर व देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बतौर मुख्य अतिथि इस ऐतिहासिक पासिंग आउट परेड की समीक्षा की। उन्होंने परेड की सलामी ली और शानदार मार्च पास्ट के बाद सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जांबाज ऑफिसर कैडेट्स को प्रतिष्ठित मेडल्स से नवाजा। यह आईएमए के 158वें रेगुलर कोर्स और 141वें टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स की पासिंग आउट परेड थी। इससे पहले देश की बेटियों को एनडीए के जरिए सेना में सीधे प्रवेश की अनुमति नहीं थी। जून 2022 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक ऐतिहासिक फैसले के बाद महिलाओं के लिए एनडीए के रास्ते खोले गए थे। आज उसी पहले बैच की बेटियां जब कंधे पर सितारे सजाकर आईएमए के 'चेटवुड हॉल' के सामने अंतिम पग पार कर रही थीं, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें गर्व से नम थीं। अब भारतीय सेना के सशस्त्र बलों के कोर ऑपरेशन्स में भी महिलाएं मुख्य और अग्रिम भूमिका निभाती नजर आएंगी।

देश की बेटियों के इस अदम्य साहस पर गहरा गर्व जताते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे देश की प्रगति का एक अहम और ऐतिहासिक पड़ाव बताया। परेड को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "यह गौरवशाली पल केवल हमारी सशस्त्र सेनाओं के इतिहास में ही एक मील का पत्थर नहीं है, बल्कि यह बदलते भारत में 'महिला-नेतृत्व वाले विकास' की दिशा में पूरे देश के लिए एक बेहद प्रेरक और जीवंत उदाहरण है। राष्ट्रपति ने युवा सैन्य अधिकारियों को देश सेवा का वास्तविक अर्थ समझाते हुए कहा कि लीडरशिप सिर्फ कमान संभालने या हुक्म चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपके मजबूत चरित्र, करुणा और राष्ट्र के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा, "अब देश की संप्रधातु, एकता और अखंडता की रक्षा का जिम्मा आपके इन युवा कंधों पर है। देश के 140 करोड़ नागरिकों की उम्मीदें और भरोसा आपसे जुड़ा है, इसलिए देश सेवा को ही अपने जीवन का सर्वोच्च कर्तव्य मानें। राष्ट्रपति ने अधिकारियों को याद दिलाया कि एक बेहतरीन सैन्य अफसर वही है जो सिर्फ युद्ध में सैनिकों का नेतृत्व न करे, बल्कि संकट के समय एक अभिभावक की तरह उनकी देखभाल और सही मार्गदर्शन भी करे। उन्होंने युवा अफसरों से आईएमए के मूल आदर्श वाक्य 'वीरता और विवेक' को अपने जीवन और आचरण में आत्मसात करने का आह्वान किया। भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आज का वैश्विक परिदृश्य और युद्ध लड़ने के तौर-तरीके तकनीक के कारण तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में भारतीय सेना को साइबर, स्पेस और अन्य उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए हमेशा 'फ्यूचर रेडी' यानी भविष्य के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कैडेट्स से जीवनभर नया सीखने और इनोवेशन को अपनाने की अपील की। समारोह के अंत में राष्ट्रपति ने देश के सबसे कठिन प्रशिक्षणों में से एक को सफलतापूर्वक पूरा करने पर सभी भारतीय और मित्र देशों के जांबाज कैडेट्स को बधाई दी। उन्होंने इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे कैडेट्स के माता-पिता के त्याग और आईएमए के कमांडेंट व प्रशिक्षकों की कड़ी मेहनत की भी दिल खोलकर सराहना की। पीप्स सेरेमनी के बाद जैसे ही इन 9 महिला अफसरों के कंधों पर सितारों चमके, पूरा आईएमए परिसर भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा।