अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम: टिहरी झील में पीएम मोदी के संभावित कार्यक्रम को लेकर रिहर्सल शुरू

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टिहरी। उत्तराखंड से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लगाव किसी से छिपा नहीं है, लेकिन इस बार उनका देवभूमि दौरा एक नया इतिहास रचने जा रहा है। अपने दो दर्जन से अधिक उत्तराखंड दौरों के बावजूद प्रधानमंत्री अब तक टिहरी जिले की धरती पर कदम नहीं रख पाए थे। अब यह इंतजार खत्म होने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार टिहरी के सीधे दौरे पर आ रहे हैं, जहां वे देश की एक बेहद महत्वाकांक्षी ऊर्जा परियोजना का लोकार्पण करेंगे।

प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड से हमेशा विशेष जुड़ाव रहा है। धार्मिक आस्था, पर्यटन, चुनावी सभाओं और विकास परियोजनाओं के सिलसिले में वह अब तक राज्य के अधिकांश जिलों का दौरा कर चुके हैं, लेकिन टिहरी जिला अब तक उनके सीधे दौरे से अछूता रहा था। अब पहली बार टिहरी की धरती प्रधानमंत्री के स्वागत की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री टिहरी पहुंचकर 1000 मेगावाट क्षमता वाली टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट परियोजना का लोकार्पण कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री का यह दौरा मई के अंतिम सप्ताह या जून महीने में प्रस्तावित है। यह परियोजना देश की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परियोजनाओं में गिनी जा रही है, जो भविष्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ ऊर्जा संरक्षण और ग्रिड बैलेंसिंग में भी अहम भूमिका निभाएगी। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ इसे उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए रणनीतिक महत्व की परियोजना मान रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले कई बार केदारनाथ और बदरीनाथ धाम पहुंच चुके हैं। रुद्रप्रयाग और चमोली जिले उनके धार्मिक दौरों के प्रमुख केंद्र रहे हैं। इसके अलावा अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम, पिथौरागढ़ के आदि कैलाश, उत्तरकाशी के मुखवा गांव और नैनीताल के कॉर्बेट टाइगर रिजर्व जैसे स्थानों पर भी प्रधानमंत्री का दौरा हो चुका है। वहीं देहरादून, हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में उन्होंने कई राजनीतिक और सरकारी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है।

ऐसे में टिहरी का यह दौरा खास माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार प्रधानमंत्री किसी बड़े कार्यक्रम के लिए जिले में पहुंचेंगे। स्थानीय लोगों में इसे लेकर खास उत्साह देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि अब तक उन्होंने प्रधानमंत्री को केवल टीवी या दूसरे जिलों की सभाओं में देखा था, लेकिन पहली बार उन्हें अपने जिले में प्रधानमंत्री को सुनने और देखने का अवसर मिलेगा। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री इस दौरान टिहरी मेडिकल कॉलेज की आधारशिला भी रख सकते हैं। साथ ही क्षेत्र के लिए कई अन्य विकास योजनाओं की घोषणाएं होने की भी संभावना जताई जा रही है। ऐसे में यह दौरा केवल ऊर्जा परियोजना के उद्घाटन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे विकास और राजनीति दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उधर शासन स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने सचिवालय में अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रस्तावित कार्यक्रम की समीक्षा की। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था, कार्यक्रम स्थल, यातायात प्रबंधन और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। अधिकारियों को समय रहते सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय ने बताया कि पहले प्रधानमंत्री 14 अप्रैल को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे कार्यक्रम के साथ इस परियोजना का लोकार्पण करने वाले थे, लेकिन टिहरी की जनता की भावनाओं और परियोजना के महत्व को देखते हुए अब प्रधानमंत्री स्वयं टिहरी पहुंचकर इसका उद्घाटन करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का यह दौरा जिले के विकास के लिए ऐतिहासिक साबित होगा और इससे पर्यटन, स्वास्थ्य, ऊर्जा तथा आधारभूत सुविधाओं को नई गति मिलेगी। राजनीतिक दृष्टि से भी प्रधानमंत्री का यह संभावित दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। आगामी समय में उत्तराखंड में कई बड़े विकास और राजनीतिक मुद्दे चर्चा में रहने वाले हैं। ऐसे में टिहरी जैसे महत्वपूर्ण पर्वतीय जिले में प्रधानमंत्री की मौजूदगी को भाजपा के लिए भी बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल प्रधानमंत्री कार्यालय की अंतिम आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन प्रशासनिक तैयारियों ने यह लगभग साफ कर दिया है कि टिहरी जल्द ही अपने इतिहास के सबसे बड़े राजनीतिक और विकासात्मक कार्यक्रम का गवाह बनने वाला है।