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कांवड़ यात्रा में पसरा मातम: हरिद्वार में गंगनहर में नहाते समय डूबे चंडीगढ़ के 4 श्रद्धालु, दर्दनाक मौत

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हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान शुक्रवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने श्रद्धा के माहौल को मातम में बदल दिया। ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्र के जटवाड़ा पुल के पास गंगनहर में स्नान करते समय चंडीगढ़ के चार कांवड़ यात्री डूब गए, जिनकी मौके पर चलाए गए रेस्क्यू अभियान के बाद मौत हो गई। हादसे की खबर मिलते ही पुलिस, जल पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं और संयुक्त अभियान चलाकर चारों युवकों को गंगनहर से बाहर निकाला। उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने सभी को मृत घोषित कर दिया।

पुलिस के अनुसार, शुक्रवार शाम सूचना मिली कि जटवाड़ा पुल के पास कुछ कांवड़ यात्री गंगनहर में नहाते समय तेज बहाव की चपेट में आकर डूब गए हैं। सूचना मिलते ही जल पुलिस और राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) की टीमें मौके पर पहुंचीं। गोताखोरों ने तत्काल गंगनहर में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। काफी देर तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद चारों युवकों को बाहर निकाल लिया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मृतकों की पहचान शिवांशु (16) पुत्र पवन सिंह, नीतेश पुत्र राजेश, भरत पुत्र हरीश निवासी सेक्टर-16/30, चंडीगढ़ तथा रोहित पुत्र भवानी प्रजापति निवासी सेक्टर-26, चंडीगढ़ के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, चारों युवक कांवड़ यात्रा के लिए हरिद्वार आए थे और गंगाजल लेने से पहले गंगनहर में स्नान कर रहे थे। इसी दौरान वे गहरे पानी और तेज बहाव की चपेट में आ गए। हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने चारों शवों को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल की मोर्चरी भेज दिया, जहां पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके साथ ही मृतकों के परिजनों को हादसे की सूचना दे दी गई है। घटना के बाद अस्पताल और घटनास्थल पर शोक और गम का माहौल देखने को मिला। रेस्क्यू अभियान में जल पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अभियान का नेतृत्व एएसआई अतुल सिंह ने किया। टीम में हेड कांस्टेबल नरेंद्र नेगी, प्रदीप सिंह रावत, गगनदीप सिंह, गोताखोर जानू पाल, मनोज बहुखंडी, चिराग अरोड़ा और वाहन चालक मनमोहन सिंह नेगी शामिल रहे। टीम ने तेज बहाव और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद अभियान को अंजाम दिया। हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन लगातार श्रद्धालुओं से गहरे पानी में न उतरने और केवल निर्धारित एवं सुरक्षित घाटों पर ही स्नान करने की अपील करता रहा है। इसके बावजूद कई श्रद्धालु जोखिम उठाकर प्रतिबंधित या असुरक्षित स्थानों पर स्नान करने चले जाते हैं, जिससे इस तरह की दर्दनाक घटनाएं सामने आती हैं। इस हादसे ने एक बार फिर कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित किया है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे सुरक्षा निर्देशों का पूरी तरह पालन करें, चेतावनी संकेतों की अनदेखी न करें और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहें, ताकि आस्था की यात्रा किसी परिवार के लिए जीवनभर का दुख न बन जाए।