सावधान! उत्तराखंड के सात जिलों में खराब मौसम की चेतावनी, प्रशासन ने जारी की गाइडलाइन

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टिहरी गढ़वाल जिले में शनिवार शाम आए तेज आंधी-तूफान ने एक बड़ा हादसा टाल दिया, जहां डोबरा-चाटी क्षेत्र में झील के बीच बने फ्लोटिंग हटमेंट क्षतिग्रस्त हो गए और करीब 25 से 30 लोग उसमें फंस गए। समय रहते एसडीआरएफ (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल) की टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस त्वरित कार्रवाई से एक संभावित बड़ी त्रासदी टल गई।

घटना की सूचना मिलते ही आपदा कंट्रोल रूम हरकत में आया और कोटी कॉलोनी स्थित एसडीआरएफ पोस्ट से उपनिरीक्षक नरेंद्र राणा के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम को तुरंत रवाना किया गया। टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर देखा कि तेज हवाओं और तूफान के कारण फ्लोटिंग हटमेंट टूटकर बह गए थे, जिससे वहां मौजूद लोग झील में फंस गए थे। बिना समय गंवाए एसडीआरएफ ने बचाव अभियान शुरू किया और सभी लोगों को सुरक्षित निकालकर पर्यटन विभाग की नावों के जरिए कोटी कॉलोनी पहुंचाया। इस घटना के बाद प्रशासन और भी सतर्क हो गया है, क्योंकि मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों में आगामी दिनों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। चार और पांच मई को देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत और ऊधम सिंह नगर में तेज आंधी, बारिश और खराब मौसम की संभावना जताई गई है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने इस चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए सभी जिलों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि सभी संबंधित विभागों को किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रैकिंग गतिविधियों को नियंत्रित करने, संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाने और राहत एवं बचाव दलों को पूरी तरह तैयार रहने को कहा गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग, लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई और बीआरओ जैसी एजेंसियों को सड़क बाधित होने की स्थिति में तत्काल बहाली के निर्देश दिए गए हैं।इसके अलावा, ग्राम स्तर तक अधिकारियों को सक्रिय रहने, आवश्यक उपकरणों और संसाधनों को तैयार रखने तथा विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और सतर्क रहें। टिहरी की इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सजगता और त्वरित प्रतिक्रिया ही बड़े हादसों को टाल सकती है।